
भाजपा सरकार की घोषणा अधूरी, राम नाम के मेले का अस्तित्व खत्म
तीर्थ मेला विकास प्राधिकरण के माध्यम से प्रतिवर्ष 25 लाख की राशि देने की घोषणा हवा हवाई, रामलोक बनाने के दावे पर राम नवमी मेले के लिए नहीं है राशि, मेला शुरू होने में बचे 7 दिन, सब कुछ राम भरोसे
राहुल सेन मांडव
मो 9669141814
मांडू न्यूज/सरकार की अनदेखी के चलते विश्व में एकमात्र मांडू में विराजे चतुर्भुज श्री राम के नाम से शताब्दियों से चल रही मेले की समृद्ध परंपरा खत्म होने की कगार पर है। प्राचीन परंपरा को कायम रखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने संस्कृति विभाग एवं तीर्थ मेला विकास प्राधिकरण के माध्यम से प्रतिवर्ष 25 लाख रुपए देने की घोषणा की थी जो 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरी है। मांडू में करोड़ों की लागत से राम लोक बनाने के दावे करने वाले सरकार के मंत्रियों के पास मेले के आयोजन के लिए छोटी सी राशि भी नहीं है। मेला शुरू होने में 7 दिन बचे हैं पर कोई चोल चाल नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रामनवमी मेले का हश्र क्या होगा।
आपको बता दें प्राचीन धार्मिक इतिहास के अनुसार सन 1824 से पिछले 200 वर्षों से भी ज्यादा समय से यहां रामनवमी पर मेले की परंपरा अनवरत जारी है। जो देखरेख के अभाव में हाट बाजार से छोटे स्वरूप की स्थिति में पहुंच चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद के पास मेले के आयोजन करने के लिए बजट राशि नहीं है। परिषद ने धार कलेक्टर को पत्र लिखकर मेले के लिए राशि उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। पर्यटन और धार्मिक दृष्टिकोण से मध्य प्रदेश का बड़ा केंद्र होने के बाद भी यहां की नगर परिषद की कंगालीया स्थिति भी विकास के दावों की पोल खोलती है। सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर पत्रकार राहुल सेन मांडव ने 2023 मैं मेले की दुर्दशा को लेकर समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार की तत्कालीन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने खबर पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग और रामायण केंद्र भोपाल के अधिकारियों का दल रामनवमी के दिन मांडू भेजा था। उन्होंने यहां की परंपरा और प्रतिमा को दुर्लभ बताते हुए अपनी रिपोर्ट मंत्री को दी थी। इसके बाद तत्कालीन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ठाकुर ने तीर्थ मेला विकास प्राधिकरण के माध्यम से मांडू के रामनवमी मेले की परंपरा को कायम रखने के लिए प्रतिवर्ष 25 लाख रुपए की राशि देने की बात की थी पर 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यह घोषणा अधूरी ही है।
मेला शुरू होने में बचे 7 दिन, सब कुछ राम भरोसे
26 मार्च को रामनवमी है, सप्तमी से मेला शुरू होकर दशमी तक चलता है। मेला शुरू होने में अब 7 दिन भी नहीं बचे हैं। नगर परिषद के अनुसार मेले के लिए राशि का अभाव है। सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी तो ठीक अब तक प्रचार प्रसार के लिए पंपलेट भी नहीं छपे हैं। आसपास के व्यापारियों को मेले की जानकारी ही नहीं है। नगर परिषद ने अब तक मेला समिति बनाई है या नहीं इसकी जानकारी भी किसी को नहीं है। कुल मिलाकर सब राम भरोसे हैं।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के राम लोक बनाने के दावे, मेले के लिए नहीं है राशि
इस विषय में एक बड़ी बात यह भी है कि सरकार से जुड़े जनप्रतिनिधि चतुर्भुज श्री राम परिसर को रामलोक बनाने का दावा कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर कई बार मांडू में रामलोक बनाने का प्रयास करने की बात सार्वजनिक रूप कह चुकी है। मांडू आगमन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद चतुर्भुज श्री राम के दर्शन करने पहुंचे थे और उन्होंने राम लोक बनाने के सवाल पर इस दिशा में सकारात्मक पहल करने की बात कही थी। यहा पार्षद से प्रधानमंत्री सत्ताधारी दल के हैं इसके बाद भी छोटी-छोटी घोषणाएं क्यों पूरी नहीं होती। रामलोक के दावे तो ठीक भगवान राम से जुड़ी इस प्राचीन समृद्ध धार्मिक परंपरा को जारी रखने में भी सरकार नाकाम सिद्ध हो रही है।
देश में एकमात्र मांडू में विराजित है चार हाथ वाले राम की दुर्लभ प्रतिमा
मांडू का चतुर्भुज श्री राम मंदिर दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है जहां भगवान राम चतुर्भुज चार भुजाओं वाले रूप में विराजे हैं ।जिसमें वह धनुष, बाण, कमल और माला धारण किए हुए हैं। यह प्रतिमा लगभग 1125 वर्ष पुरानी मानी जाती है। यहां रामलला के दाहिने हाथ में धनुष, कमल और बाएं हाथ में बाद माला है चरण नल नील भी विराजमान है। इतिहास चमत्कारिक है ।1823 में पुणे महाराष्ट्र के संत रघुनाथ दास महाराज को स्वप्न देकर मांडू में एक गूलर वृक्ष के नीचे खुदाई के दौरान यहां चतुर्भुज श्री राम ,सीता ,लक्ष्मण ,दास हनुमान, सूर्य नारायण और भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा निकली थी। वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है यहां विशेष रूप से रामनवमी पर देशभर के भक्त पहुंचकर प्रभु चतुर्भुज श्री राम का आशीर्वाद लेते हैं।